अपने लाला की सुन लो शिकायत जो बताने के काबिल नहीं है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अपने लाला की सुन लो शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है,

वो जो देता है दर्द ये दिल को,

वो दिखाने के काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

मैया पहली शिकायत हमारी,

पनघट पे मिले थे मुरारी,

या ने तोड़ी गगरिया हमारी,

जल भरने के काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

मैया दूसरी शिकायत हमारी,

गलियों में मिले थे मुरारी,

वा ने फाड़ी चुनरिया हमारी,

ओढ़ने के जो काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

मैया तीसरी शिकायत हमारी,

महलों में मिले थे मुरारी,

या ने तोड़ी नथनिया हमारी,

मुंह दिखाने के काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

मेरे लाला को प्यार सु बुलाती,

माखन मिश्री का भोग लगाती,

ये तो प्राणो से प्यारा कन्हैया,

ये शिकायत के काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

अपने लाला की सुन लो शिकायत,

जो बताने के काबिल नहीं है,

वो जो देता है दर्द ये दिल को,

वो दिखाने के काबिल नहीं है,

अपने लाला की सुन लों शिकायत,

॥ दोहा ॥

जो बताने के काबिल नहीं है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।