अनमोल तेरा जीवन, यूँ ही गँवा रहा है

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॥ पावन पाठ ॥

अनमोल तेरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है,

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है ॥

सपनो की नींद में ही,

यह रात ढल न जाये,

पल भर का क्या भरोसा,

कही जान निकल ना जाये,

गिनती की है ये साँसे,

यूँ ही लुटा रहा है ।

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है ॥

जायेगा जब यहाँ से,

कोई ना साथ देगा,

इस हाथ जो दिया है,

उस हाथ जा के लेगा,

कर्मो की है ये खेती,

फल आज पा रहा है ।

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है ॥

ममता के बन्धनों ने,

क्यों आज तुझको घेरा,

सुख में सभी है साथी,

कोई नहीं है तेरा,

तेरा ही मोह तुझको,

कब से रुला रहा है ।

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है ॥

जब तक है भेद मन में,

भगवान से जुदा है,

खोलो जो दिल का दर्पण,

इस घर में ही खुदा है,

सुख रूप हो के भी तू,

दुःख आज पा रहा है ।

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है ॥

अनमोल तेरा जीवन,

यूँ ही गँवा रहा है,

किस ओर तेरी मंजिल,

किस ओर जा रहा है,

अनमोल तेंरा जीवन,

॥ दोहा ॥

यूँ ही गँवा रहा है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।