अमृत की बरसे बदरीया

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अमृत की बरसे बदरीया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

बाबा की दुअरिया ॥

दादुर मोर पपीहा बोले,

दादुर मोर पपीहा बोले,

कूके काली कोयलिया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

बाबा की दुअरिया ॥

भगत बाबा की आरती की उतारे,

भगत बाबा की आरती की उतारे,

भीड़ है तेरी नगरिया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

बाबा की दुअरिया ॥

चन्दन तिलक चाँद सा चमके,

चन्दन तिलक चाँद सा चमके,

राम जी देखे नजरिया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

बाबा की दुअरिया ॥

ब्रह्मा विष्णु शंकर नाचे,

ब्रह्मा विष्णु शंकर नाचे,

मोहन बजाए बंसुरिया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

बाबा की दुअरिया ॥

अमृत की बरसे बदरीया,

बाबा की दुअरिया,

अमृत की बरसें बदरीया,

॥ दोहा ॥

बाबा की दुअरिया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।