अम्बे कहा जाये जगदम्बे कहा जाये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे कहा जाये जगदम्बे कहा जाये,

बोल मेरी मैया तुझे क्या कहा जाये ॥

मैंने सोने का टीका बनवाया,

मेरी मय्या को पसन्द नहीं आया,

उसे फूलों का टीका पसन्द आया,

अम्बे कहा जाए जगदम्बे कहा जाए,

बोल मेरी माता तुझे क्या कहा जाये ॥

मैंने सोने के कंगन बनवाये,

मय्या को पसन्द नहीं आये,

उसे फूलों के कंगन पसन्द आये,

अम्बे कहा जाए जगदम्बे कहा जाए,

बोल मेरी माता तुझे क्या कहा जाये ॥

मैंने सोने का हार बनवाया,

मइया को पसन्द नहीं आया,

उसे फूलों का हार पसन्द आया,

अम्बे कहा जाए जगदम्बे कहा जाए,

बोल मेरी माता तुझे क्या कहा जाये ॥

मैंने सोने की तगड़ी बनवायी,

मइया को पसन्द नहीं आयी,

उसे तो फूलों की तगड़ी पसन्द आयी,

अम्बे कहा जाए जगदम्बे कहा जाए,

बोल मेरी माता तुझे क्या कहा जाये ॥

अम्बे कहा जाये जगदम्बे कहा जाये,

बोल मेरी मैया तुझे क्या कहा जाये ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।