हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

देखियो चाहत कमल नैन को,

निसदिन रहेत उदासी,

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

आये उधो फिरी गए आँगन,

दारी गए गर फँसी,

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

केसर तिलक मोतीयन की माला,

ब्रिन्दावन को वासी,

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

काहू के मन की कोवु न जाने,

लोगन के मन हासी,

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

सूरदास प्रभु तुम्हारे दरस बिन,

लेहो करवट कासी,

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ

॥ दोहा ॥

अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।