स्वामी अखंडानंद

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Swami Vivekananda Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | अखंडानंद

असली नाम- गंगाधर घटक

अन्य नाम - स्वामीजी

गुरु - श्री रामकृष्ण

आराध्या - माता काली

जन्म – 30 सितम्बर 1864

जन्म स्थान - अहिरीटोला, कोलकाता

मृत्यु दिवस - 7 फरवरी 1937, बेलूर मठ, हावड़ा

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - बंगाली, अंग्रेजी, संस्कृत

पिता - श्रीमंत गंगोपाध्याय

माता - वामसुन्दरी देवी

प्रसिद्ध - भारतीय आध्यात्मिक गुरु, रामकृष्ण मिशन के तीसरे अध्यक्ष

स्वामी अखंडानंद एक महान उपदेशक और समाज सुधारक थे। उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की और वेदांत का संदेश प्रचारित किया। उन्होंने गरीबों और वंचितों के उत्थान के लिए भी काम किया। वह एक महान देशभक्त थे और अपने देश से बहुत प्यार करते थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए काम किया और कई स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक महान प्रेरणा थे।

अखंडानंद स्वामी विवेकानन्द के प्रबल अनुयायी थे, जो उन्हें प्यार से गंगा कहकर बुलाते थे। वह शारदा देवी के प्रति भी समर्पित थे। वह रामकृष्ण मिशन के तीसरे अध्यक्ष थे।

स्वामी अखंडानंद एक महान संत और महान व्यक्ति थे। वह स्वामी विवेकानन्द और उनकी शिक्षाओं के सच्चे अनुयायी थे। उन्होंने सादा जीवन जिया और अपना जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया। वह कई लोगों के लिए एक महान प्रेरणा थे और उनकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों तक लोगों को प्रेरित करती रहेंगी।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल | स्वामी अखंडानंद | Bhaktamal | Swami Akhandananda

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।