अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ ना पाया

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे,

ऊँचा तेरा धाम,

हे कैलाश के वासी भोले,

हम करते है तुझे प्रणाम ।

अजब है तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया,

गजब का खेल रचाया,

सबसे बढ़ा है तेरा नाम,

भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ ॥

अद्भुत है संसार यहाँ पर कई भूलेखे है,

तरह तरह के खेल जगत मे हमने देखे है,

तू है भाग्य विधाता तेरे लेख सुलेखे है,

तू लिखने वाला है ये सब तेरे लेखे है

अजबहै तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया ॥

अजब है तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया,

गजब का खेल रचाया,

सबसे बढ़ा है तेरा नाम,

भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ ॥

पारब्रह्म परमेश्वर तू है हर कोई माने रे,

सब तेरे बालक है क्या अपने बेगान रे,

तू अंतर्यामी सबकी पीडा पहचाने रे,

सबके ही हृदय मे बैठा घट घट की जाने रे,

अजबहै तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया ॥

अजब है तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया,

गजब का खेल रचाया,

सबसे बढ़ा है तेरा नाम,

भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ ॥

हे योगेश्वर योग से तुने जगत बनाया है,

तन पे तूने भस्म रमा के अलख जगाया है,

कही धुप के रंग सुनहरे कही पे छाया है,

तूने किया है वही जो तेरे मन को भाया है,

अजब है तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया ॥

अजब है तेरी माया,

इसे कोई समझ ना पाया,

गजब का खेल रचाया,

सबसे बढ़ा है तेरा नाम,

॥ दोहा ॥

भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।