ऐसा है मेरे श्री हरि का नाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Janmashtami Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऐसा है मेरे श्री हरि का नाम ,

कैसे उनका करूँ गुणगान, बाकी कोई न करुणानिधान ॥

ऐसा है मेरे.....

निष्छल भक्ति तेरी हरदम होती है ,

लेते हैं जब परीक्षा तब तब रोती है ,

ग्राह गज की कथा में कहा है ,

गज की प्रभु ने बचाई है जान ,

ऐसा है मेरे .......

तेरी ही इक कृपा से प्रह्लाद बनते हैं ,

ध्रव सा महा तपस्वी तेरा नाम जपते हैं ,

जिनको विपदा से तुमने उबारा ,

दे दिया उनको अपना ही धाम ,

ऐसा है मेरे.........

संतो की वाणी लिरिक्स

एक बार में भी उपकार करते हैं ,

निर्धन विप्र सुदामा के भंडार भरते हैं ,

द्रोपदी की बचाई थी लाज ,

उनको ही है मेरा प्रणाम ,

ऐसा है मेरे......

जूठे बेर खाकर संदेश देते हैं ,

केवट का भी कहना कैसे मान लेते हैं ,

शिल की तारी थी तुमने अहिल्या ,

सबके पूरे हुए अरमान ,

॥ दोहा ॥

ऐसा है मेरे श्री हरि का नाम ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।