अग्नि देव गायत्री मन्त्र

पारंपरिक
अन्य मंत्र Mantra Agnidev Gayatri Mantra Mantra
॥ दोहा ॥

॥ अग्नि देव गायत्री मन्त्र ॥

॥ चौपाई ॥

ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्नि मध्याय धीमहि।

तन्नो अग्निः प्रचोदयात्॥

मन्त्र अर्थ

ॐ, मैं उन महान ज्योति का ध्यान कर रहा हूँ, जो अग्नि के मध्य में निवास करते हैं। हे अग्नि देव! अपने अग्नि रूपी तेज से मेरी बुद्धि एवं मन को प्रकाशित करें तथा हमें सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।