अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Prabhu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,

तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥

हमारे लिए क्यों देर किए हो,

हमारे लिए क्यों देर किए हो,

गणिका अजामिल को पल में उबारे,

गणिका अजामिल को पल में उबारे,

अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,

तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥

पतितो को पावन करते कृपानिधि,

पतितो को पावन करते कृपानिधि,

किए पाप है इस सुयश के सहारे,

किए पाप है इस सुयश के सहारे,

अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,

तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥

माना अगम है अपावन कुटिल है,

माना अगम है अपावन कुटिल है,

सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,

सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,

अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,

तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥

अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,

॥ दोहा ॥

तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।