मीरा बाई भजन: ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

घायल की गति घायल जाणै,

जो कोई घायल होय ।

जौहरि की गति जौहरी जाणै,

की जिन जौहर होय ॥

सूली ऊपर सेज हमारी,

सोवण किस बिध होय ।

गगन मंडल पर सेज पिया की,

किस बिध मिलणा होय ॥

दर्द की मारी बन-बन डोलूं,

वैद्य मिल्या नहिं कोय ।

मीरा की प्रभु पीर मिटेगी,

जद वैद्य सांवरिया होय ॥

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

--- Extra Lines ---

ना मैं जानू आरती वन्दन,

ना पूजा की रीत ।

लिए री मैंने दो नैनो के,

॥ दोहा ॥

दीपक लिए संजोये ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।