अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

हीरा सा जनम क्यों विरथा गवायों

ना सत्संग कियो हरी गुण गायो

जननी तेरी तुझे फिर ना जनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

तेरी जवानी भरम भुलानी

गुरु पितु मात की बात मानी

नैया कहो कैसे पार लगेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

ओ प्राणी तेरी माटी

धरणी गिरत है पतंग ज्यो काटी

माटी में माटी मिल रहेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी

नर तन बार बार नहीं मिलता

नर तन बार बार नहीं मिलता

नर तन बार बार नहीं मिलता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।