अब दया करो हे भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अब दया करो हे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

तेरे चरणों में हो मेरा माथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

तेरे द्वार खड़े है रख ले लाज,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

मैं तो झूम झूम के नाचूं आज,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

जपू हर हर भोले दिन और रात,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

मेरे मन में बसे हो भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

अब दया करो हे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो हें भोलेनाथ,

॥ दोहा ॥

मस्त रहूं तेरी मस्ती में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।