आयो सावणियो, दादी जी म्हारी, हिंडो हिन्डै आज

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आयो सावणियो,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों,

बेला गुलाब चंपा माही,

खूब सज्यो सिणगार,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

झीणो झीणो चमकै मुखड़ो,

भक्तां रो मन हरखै जी,

मिल भगतां के सागै दादी,

करां सिंधारा आज,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

माथे पे बिंदिया हाथ में कंगना,

चुनड़ी चमचम चमके है,

केडसती म्हारी बनड़ी बणी है,

कर सोलह सिणगार,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

पांव में पायल कान में झुमका,

नाक की नथली प्यारी है,

लाल सुरंगी मेहंदी हाथा,

नयना कजरै की धार,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

रिमझिम रिमझिम बरखा बरखै,

सावणियो आयो प्यारो जी,

अंतर केसर की खुशबू से,

मैहक रह्यो दरबार,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

ठुमक ठुमक कर थिरक थिरक कर,

म्हें तो मंगल गावां जी,

बिन घुंघरू के म्हें तो नाचां,

नाचां नव नव ताल,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

घूम घूम कर घूमर घाल्यां,

ढोल बजावां कोई थाल,

झूम झूम कर ‘मधु’ तो नाचे,

माँ ने रिझावै आज,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

आयो सावणियो,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों,

बेला गुलाब चंपा माही,

खूब सज्यो सिणगार,

आयो सावणियों,

ओ आयो सावणियों,

दादी जी म्हारी,

हिंडो हिन्डै आज,

आयो सावणियों ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।