आयो फागणियो अलबेलो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आयो फागणियो अलबेलो,

बाबा श्याम धणी को मेलो,

चाल्यो भगता को यो रेलो,

खाटू श्याम जी,

ओ खाटू धाम जी ॥

कपड़ो रेशम वालो ल्यायो,

खुद हाथा निशाण बणायो,

गोटो चारू मेर लगायो,

खाटू श्याम जी,

अन्तर छ्डक्यो निशाण के ऊपर,

फिर में ढोक दियो सर रखकर,

बांध्यो जोर से कमर के ऊपर,

यो निशान जी,

यो निशान जी,

आयो फागणियो अलबेलों,

बाबा श्याम धणी को मेलो,

चाल्यो भगता को यो रेलो,

खाटू श्याम जी,

ओ खाटू धाम जी ॥

ओ गेला माही ठाठ अनोखा,

खातिर करे भगत की चोखा,

तू भी क्यूं चूके ये मौका,

सारा नाचता कूदता आया,

सब प्रेमिया से प्रेम बढ़ाया,

मिलकर घणा ही आनन्द आया,

खाटू श्याम जी,

खाटू धाम जी ॥

पूरो खाटू नगरी घूम्यो,

मनडो म्हारो घणो ही झूम्यो,

जद मुं थारी चौखट चूम्यो,

खाटू श्याम जी,

थारा विशाल दर्शन पाया,

नैणा झर झर नीर बहाया,

इतना दिना में मैं क्यूं आया,

खाटू धाम जी,

आयो फागणियो अलबेलों,

बाबा श्याम धणी को मेलो,

चाल्यो भगता को यो रेलो,

खाटू श्याम जी,

ओ खाटू धाम जी ॥

दर्शण कर बाबा सू बोल्यो,

‘राजू’ जो भी श्याम को होल्यो,

थे किस्मत को तालों खोल्यो,

खाटू श्याम जी,

उकी घर करे यू रूखाली,

उको बण ज्या यो खुद हाली,

खाटू श्याम जी,

आयो फागणियो अलबेलों,

बाबा श्याम धणी को मेलो,

चाल्यो भगता को यो रेलो,

खाटू श्याम जी,

ओ खाटू श्याम जी ॥

आयो फागणियो अलबेलो,

बाबा श्याम धणी को मेलो,

चाल्यो भगता को यो रेलो,

खाटू श्याम जी,

॥ दोहा ॥

ओ खाटू धाम जी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।