आरती युगलकिशोर की कीजै

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Yugal Kishore Aarti
॥ पावन पाठ ॥

आरती युगलकिशोर की कीजै ।

तन मन धन न्योछावर कीजै ॥

गौरश्याम मुख निरखन लीजै ।

हरि का रूप नयन भरि पीजै ॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा ।

ताहि निरखि मेरो मन लोभा ॥

ओढ़े नील पीत पट सारी ।

कुंजबिहारी गिरिवरधारी ॥

फूलन सेज फूल की माला ।

रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला ॥

कंचन थार कपूर की बाती ।

हरि आए निर्मल भई छाती ॥

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी ।

आरती करें सकल नर नारी ॥

नंदनंदन बृजभान किशोरी ।

॥ दोहा ॥

परमानंद स्वामी अविचल जोरी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।