ॐ जय जय शनि महाराज: श्री शनिदेव आरती

संत सूरदास
श्री राम आरती Aarti Shri Shani Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय जय शनि महाराज,

स्वामी जय जय शनि महाराज ।

कृपा करो हम दीन रंक पर,

दुःख हरियो प्रभु आज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

सूरज के तुम बालक होकर,

जग में बड़े बलवान ।

सब देवताओं में तुम्हारा,

प्रथम मान है आज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

विक्रमराज को हुआ घमण्ड फिर,

अपने श्रेष्ठन का ।

चकनाचूर किया बुद्धि को,

हिला दिया सरताज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

प्रभु राम और पांडवजी को,

भेज दिया बनवास ।

कृपा होय जब तुम्हारी स्वामी,

बचाई उनकी लॉज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

शुर-संत राजा हरीशचंद्र का,

बेच दिया परिवार ।

पात्र हुए जब सत परीक्षा में,

देकर धन और राज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

गुरुनाथ को शिक्षा फाँसी की,

मन के गरबन को ।

होश में लाया सवा कलाक में,

फेरत निगाह राज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

माखन चोर वो कृष्ण कन्हाइ,

गैयन के रखवार ।

कलंक माथे का धोया उनका,

खड़े रूप विराज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

देखी लीला प्रभु आया चक्कर,

तन को अब न सतावे ।

माया बंधन से कर दो हमें,

भव सागर ज्ञानी राज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

मैं हूँ दीन अनाथ अज्ञानी,

भूल भई हमसे ।

क्षमा शांति दो नारायण को,

प्रणाम लो महाराज ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

ॐ जय जय शनि महाराज,

स्वामी जय-जय शनि महाराज ।

कृपा करो हम दीन रंक पर,

दुःख हरियो प्रभु आज ॥

॥ दोहा ॥

॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।