आनंद ही आनंद बरस रहा

गुरु नानक देव जी
अन्य भजन Bhajan Guru Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

धन भाग्य हमारे आज हुए

शुभ दर्शन ऐसे सद्गुरु के ।

पावन कीनी भारत भूमि

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ॥

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

क्या रूप अनुपम पायो है

जैसे तारो बीच है चंदा ।

सुरत मूरत मोहन वारी

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ॥

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

क्या ज्ञान छटा है जैसे इंद्र घटा

बरसत वाणी अमृतधारा ।

वो मधुरी मधुरी अजब धुनी

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ॥

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

गुरु ज्ञान रूपी जल बरसाकर

गुरु धर्म बगीचा लगा दिया ।

गुरु नाम रूपी जल बरसाकर

गुरु प्रेम बगीचा लगा दिया ।

खिल रही है कैसी फुलवारी

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ॥

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

आनंद ही आनंद बरस रहा

बलिहारी ऐसे सद्गुरु की ।

पाया पाया पाया,

मेने ऐसा सद्गुरु पाया ।

मेरे रघुवर कीपा किन्हीं

मेने ऐसा सद्गुरु पाया ।

पाया पाया पाया,

मेने ऐसा सद्गुरु पाया ।

मेरे रघुवर कीपा किन्हीं

मेने ऐसा सद्गुरु पाया ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।