आज सजे हैं मेरे घर के द्वारे आज विनायक मेरे आँगन पधारे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Shri Ganesh Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आज सजे हैं मेरे घर के द्वारे, आज विनायक मेरे आँगन पधारे

स्वागत तुम्हारा हे गणराजा, जागे हैं भाग हमारे

पूरे बरस राह हमने तकि, तब आज आई है ये शुभ घडी

चारों तरफ रोशनी है सजी

आसान बिछाया बड़े चाव से, मंदिर सजाया बड़े भाव से

जिसमे जले धूप-दीप-आरती ॥1॥

आज सजे हैं मेरे घर के द्वारे, आज विनायक मेरे आँगन पधारे

अद्भुत तेरा रूप है गजवदन, दर्शन किये थे भरे ना नयन

जी चाहे पल पल निहारा करूँ

सिंदूरी टीके से जगमग है भाल, कानों में कुण्डल नयन दो विशाल

सुमिरन सदा मैं तुम्हारा करूँ ॥2॥

आज सजे हैं मेरे घर के द्वारे, आज विनायक मेरे आँगन पधारे

जय हे चतुर्भुज तुम्हारी दया, जिसको मिली धन्य वो हो गया

जीवन में उसके रही ना तरस

इतना की बस मांगे वरदान हम, करते रहें तेरा गुणगान हम

सेवा का अवसर मिले हर बरस ॥3॥

आज सजे हैं मेरे घर के द्वारे, आज विनायक मेरे आँगन पधारे

स्वागत तुम्हारा हे गणराजा, जागे हैं भाग हमारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।