आज मिल्या मौका, भोले के दर्शन पाने का

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आज मिल्या मौका,

भोले के दर्शन पाने का,

नीलकण्ठ पै चाल नही,

कोए काम उलहाणे का ॥

हर की पौड़ी जाकै न,

हम गंगा जी मै न्हावा रै,

बम बम बम बम बोल कै,

फेर कांधै कांवड़ ठांवा रै,

भोले नाथ जब साथ,

काम कुछ ना घबराने का,

नीलकण्ठ पै चाल नही,

कोए काम उलहाणे का ॥

मस्त महीना सामण का,

यो रिमझिम पडै फुहार सुणो,

कावड़ियो और भोले नाथ का,

मिलता सही विचार सुणो,

अपणे हाथा घोट घोट के,

भांग पीलाणे का,

नीलकण्ठ पै चाल नही,

कोए काम उलहाणे का ॥

भीमसेन तू चाल बावले,

क्यू ज्यादा घबरावै सै,

जिसनै भोले नाथ बुलावै,

वो ही कावड़ लयावै सै,

भोले नाथ तै मौका सै,

बोलण बतलाने का,

नीलकण्ठ पै चाल नही,

कोए काम उलहाणे का ॥

आज मिल्या मौका,

भोले के दर्शन पाने का,

नीलकण्ठ पै चाल नही,

॥ दोहा ॥

कोए काम उलहाणे का ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।