सावन भजन: आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Hariyali Teej Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

सावन की ऋतु है आई,

घनघोर घटा नभ छाई ।

ठंडी-ठंडी पड़े फुहार,

झूला झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

राधा संग में बनवारी,

झूलें हैं सखियाँ सारी ।

गावेँ गीत मल्हार,

झूला झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

हो मस्त मोर यूँ नाचे,

मोहन की मुरलिया बाजे ।

कू-कू कोयल करे पुकार,

झूला झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

भए ऐसे मगन कन्हाई,

चलती ठंडी पुरवाई ।

छम-छम बरसे मूसलधार,

झूला झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

सब सज रहीं नार नबेली,

नटखट करते अठखेली ।

कर के सोलह सिंगार,

झूला झूले राधा प्यारी ॥

आई बागों में बहार,

झूला झूले राधा प्यारी ।

झूले राधा प्यारी,

॥ दोहा ॥

हाँ झूले राधा प्यारी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।